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Sunday, May 30, 2021

चीन में एक प्राचीन बौद्ध स्तूप का पुनर्निर्माण

भारत और चीन विश्व की प्राचीनतम सभ्यताएं हैं तो इनके आपस में प्राचीन संबंध स्वाभाविक है। बीच-बीच में विवाद भी उठते रहते हैं, जो न होते तो इस उपमहाद्वीप की स्थिति और बेहतर होती। 

दोनों देशों को जोड़ने वाले विभिन्न सूत्रों में एक महत्वपूर्ण भूमिका बौद्ध धर्म की भी है जिसे स्थापित करने में सम्राट अशोक की भी अहम भूमिका रही। माना जाता है कि महात्मा बुद्ध के परिनिर्वाण के पश्चात उनके अवशेषों को एकत्र कर उन्हें विश्व के विभिन्न हिस्सों में भेजा गया था, जिनपर 84000 स्तूपों का निर्माण हुआ था। 

कहते हैं चीन में इनके आधार पर 19 स्तूपों का निर्माण हुआ था, जिनमें से अधिकतर समय के साथ प्राकृतिक प्रभाव और समुचित देखरेख के अभाव के कारण ढ़ह गए। चार स्तूप जिनके प्रमाण आज शेष हैं चीनी शहरों- नांगचेन, शियान, नानजिंग और झेजिंयाग प्रांत के नजदीक आयुवांग में थे। नांगचेन स्तूप के अवशेष कई सालों से बिखरे पड़े थे, लेकिन यहाँ से एक स्तंभ जिसपर इसकी ऐतिहासिकता का उल्लेख था के पाये जाने से संबद्ध लोगों में इसके प्रति रुचि और जागरूकता बढ़ाई।
इसके परिणामस्वरूप ज्ञालवांग द्रुकपा जो बौद्ध धर्म की महायान शाखा से जुड़ी द्रुकपा परंपरा के धार्मिक प्रमुख हैं के प्रयासों से 2007 में इस स्तूप के जीर्णोद्धार के प्रयास आरंभ हुए। इस धार्मिक समुदाय के अंतर्गत हिमालय क्षेत्र के लगभग 1000 बौद्ध मठ आते हैं। पुनर्निर्माण की इस परियोजना में बुद्ध की एक विशाल स्वर्णिम प्रतिमा और अशोक स्तंभ की प्रतिकृति को भी शामिल किया गया है।
बौद्ध धर्म की जो शाखायें पूरे एशिया में फैली हैं उनका जड़ सभी को आपस में जोड़े रह सकता है। गौतम बुद्ध के शांति का संदेश को समझना और आचरण में लाना इस पूरे क्षेत्र के विकास को सुनिश्चित करेगा।

Thursday, May 14, 2015

भारत-चीन संबंध और डॉ कोटनीस की अमर कहानी


प्रधानमंत्री मोदी आज से अपनी चीन यात्रा पर हैं। चीन के साथ हमारे संबंध ऐतिहासिक होने के साथ काफी उतार-चढ़ाव लेते हुए भी रहे हैं। दोनों देशों के साथ जुड़ी चंद खुशनुमा यादों में डॉ. द्वारकानाथ कोटनीस की स्मृतियाँ भी शामिल हैं। तो कल 'डॉ कोटनीस की अमर कहानी' की भी याद आएगी ! डॉ द्वारकानाथ कोटनीस वो भारतीय डॉक्टर थे जो 1938 में चीन-जापान युद्ध के दौरान जापानी आक्रमण के समय चीन एक राहत अभियान में गए थे। वहां वो जापानियों के बंदी भी रहे। चीनी युवती चिंग लान ( Guo Qinglan) से उन्होंने विवाह किया, जिससे उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति भी हुई- जिसका नाम Yinhua  (Yin-India और Hua-China) रखा गया। प्लेग के रोगियों का इलाज करते हुए इसी बीमारी से उनकी मृत्यु भी हुई... 

ख्वाजा अहमद अब्बास लिखित कहानी 'And one didn't didn't come back' के आधार पर सुप्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक व्ही. शांताराम ने अपनी क्लासिक फ़िल्म 'डॉ कोटनीस की अमर कहानी' बनाई थी। फ़िल्म में मुख्य भूमिका स्वयं व्ही. शांताराम और जयश्री ने निभाई थी। भारत-चीन के द्विपक्षीय संबंधों के मध्य डॉ. कोटनीस को बड़े आदर के साथ याद किया जाता है। इन दो देशों के मध्य सिर्फ ऐतिहासिक-व्यापारिक ही नहीं बल्कि ऐसे ही ठोस और सुदृढ़ नागरिक संबंधों की भी आवश्यकता है.....
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