Wednesday, January 12, 2011
विवेकानंद के विचारों की कालजयिता
Tuesday, January 11, 2011
Monday, January 10, 2011
चर्चा एक नाटक की ( दिल्ली के 13 वें 'भारत रंग महोत्सव से' )

Friday, January 7, 2011
दिल्ली का आमंत्रण : भारत रंग महोत्सव
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (National School of Drama) द्वारा आयोजित नाट्य महोत्सव का 13 वाँ आयोजन 7 – 22 जनवरी 2011 तक नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है. रंगमंचीय कला के प्रोत्साहन और विकास के उद्देश्य से आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय व अन्तराष्ट्रीय रंगमंच समूह भी साझीदारी निभाते है, जिस वजह से इस आयोजन ने आज एशिया के सबसे बड़े नाट्य उत्सव का रूप ले लिया है.
महोत्सव के आयोजन को और भी सारगर्भिता देने के लिए इस महोत्सव के समानांतर एक और आयोजन की भी रुपरेखा तैयार की जाती है, ताकि रंगमंच के इस अनूठे उत्सव से दिल्ली से बाहर के लोगों को भी जुडने का अवसर उपलब्ध हो सके और रंगमंच के अनुकूल बेहतर समझ और संस्कृति विकसित हो सके. इस बार इस समानांतर आयोजन के लिए चेन्नई को चुना गया है, 11 – से 18 जनवरी 2011 तक नाट्य आयोजन की यह श्रृंखला चेन्नई में भी जारी रहेगी.
हबीब तनवीर के ‘चरणदास चोर’ से दिल्ली में शुभारंभ होने वाले नाट्योत्सव में विविध मंचन स्थलों पर करीब 80 से ज्यादा राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय रंगमंचीय समूहों की प्रस्तुतियों के साक्षात्कार का अवसर उपलब्ध होने वाला है जिसके बारे में विस्तृत जानकारी NSD के केंद्रीय कार्यालय या वेबसाइट - www.nsd.gov.in से प्राप्त की जा सकती है.
तो चलें - नाट्योत्सव के इस महाआयोजन का लुत्फ़ उठाने ! .....
Friday, December 31, 2010
दशक के दस सबक

(जिंदगी से जो रोज एक नया सबक सिखाती है)
1. दिल की आवाज को पहचानो जो अक्सर दिमाग और बाहर के शोर में दब जाती है.
2. कोई भी निर्णय पूरे सोच – विचार के बाद लो और उसपर अडिग रहो ताकि बाद में कभी पछतावा न हो.
3. आज के दौर में कैरियर इस देश का सबसे विचारणीय मुद्दा है. अपने शौक और क्षमताओं की पहचान कर उसे कैरीयर का रूप दे सको तो महज duty की formality पूरी नहीं करोगे बल्कि उसका लुत्फ़ भी उठाओगे.
4. Problems को opportunities के रूप में लेना. याद रखना कि – “ जिस काम में जितनी ज्यादा समस्याएं आयें, समझ लेना वो काम उतना ही बेहतर होने वाला है.”
5. NCC की ट्रेनिंग कभी अनिवार्य हो या नहीं, कम – से - कम 1 वर्ष के रिसर्च का अनुभव किसी उपयुक्त गाईड के अंतर्गत जरुर ले लेना. भावार्थ समझने का मौका जीवनपर्यंत मिलता रहेगा; 1 उम्र तो थोड़ी कम ही पड़ेगी. J
6. परिवर्तन एक शाश्वत प्रक्रिया है, इससे कभी घबडाना मत. Evolution के लिए परिवर्तन भी आवश्यक है.
तो – “ सैर कर दुनिया की गाफिल, ये जिंदगानी फिर कहाँ;
जिंदगानी गर रही तो, नौजवानी फिर कहाँ ! “
7. असफलता सिर्फ यही नहीं सिखाती कि सफलता का प्रयास पुरे मन से नहीं हुआ बल्कि यह भी कि – “ सितारों के आगे जहाँ और भी हैं;
अभी मंजिलों के इम्तिहाँ और भी हैं “
8. दोस्ती सबसे बड़ी नेमत है. यह ऐसी शै है, जिसे इश्वर आपको खुद चुनने का मौका देता है. तो इस मौके को व्यर्थ मत जाने देना ताकि कल बता सको कि रिश्ते जोडने में अपनी काबिलियत उससे कम भी नहीं.
9. शादी ??? (अहूँ – अहूँ) – “ उसी से करो जिससे दोस्ती कर सकते हो, घंटों बातें कर सकते हो ”
10. और यह भी कि – “ जो तुम्हारे मन का हो अच्छा, जो न हो वो और भी अच्छा; क्योंकि उसमें भगवान की मर्जी छुपी होती है “
Wednesday, December 29, 2010
अरुणाचल से दिल्ली - शुक्रिया '2010'
Sunday, December 26, 2010
नववर्ष का उपहार : दिल्ली पुस्तक मेला


कई देशी-विदेशी प्रकाशन समूहों के साथ पुस्तक प्रेमियों के लिए पलक – पांवड़े बिछाये प्रस्तुत है यह आयोजन. तो चलें इस बार पुस्तक मेला इस निश्चय के साथ कि नववर्ष की शरुआत अपनी पसंदीदा पुस्तकों से करेंगे और उपहार में पुस्तकें देने की परंपरा को और भी सुदृढ़ कर पुस्तक पठन - पाठन की संस्कृति विकसित करने में अपना भी योगदान देंगे.
लगभग एक वर्ष से अधिक लंबे वनवास से वापसी के बाद मुख्यधारा से जुड़ने के अवसर को enjoy करने के लिए मेरे लिए तो यह आयोजन काफी महत्वपूर्ण था, मगर अपने बारे में बात अपनी अगली किसी पोस्ट में. अभी तो बस पुस्तक मेले का ही लुत्फ़ उठाएं.