Saturday, April 2, 2011

'सचिन वर्ल्ड कप - 2011'



वर्ल्ड कप का उन्माद अब अपने चरम पर है. सचिन की भावनाओं के इर्द-गिर्द ही परिभ्रमण कर रही टीम के साथ आई. सी. सी. के सितारे भी सहायक भूमिका में आ जुटे हैं. इडेन गार्डन को दरकिनार कर वानखेडे में जमाई गई इस आयोजन की आखरी महफ़िल में सचिन को अपने घरेलु दर्शकों को शतकों के शतक का तोहफा देना तो तय ही है. रही बात वर्ल्ड कप की तो टीम के महामहिम अंतिम क्षणों में प्यादे  खिलाडियों को किनारे कर अपना वजीर न चल दें तो एक वर्ल्ड कप भी सचिन के खाते में जुट ही जाना चाहिए. मगर कहीं वर्ल्ड कप भी प्याज की नियति न प्राप्त कर जाये, कहीं यह आशंका भी है. क्या करूँ अब मैदान से ज्यादा बाहर का खेल ही ज्यादा अहम हो गया है.
वैसे वर्ल्ड कप का माहौल बनाने के लिए एक फिल्म भी देखी है – ‘हैट्रिक’. नाना पाटेकर, डैनी, परेश रावल, कुणाल कपूर, रीमा अभिनीत यह फिल्म शायद पिछले वर्ल्ड कप के दौरान रिलीज हुई थी. वर्ल्ड कप की पृष्ठभूमि में इससे प्रभावित व्यक्तियों के जीवन को दर्शाती एक बार देखने के लिए अच्छी फिल्म है ये.
चलते – चलते टीम ऑफ इंडिया को समर्पित करता हूँ ‘मैं आजाद हूँ’ फिल्म का वह गीत जिसे हिंदी सिनेमा के चंद प्रेरक गीतों में एक माना जाता है.
“इतने बाजू - इतने सर, गिन लें दुश्मन ध्यान से;
हारेगा वो हर बाजी जब खेलें हम जी - जान से.” 

4 comments:

Sawai Singh Rajpurohit said...

बस,कुछ मिनट और काउंटडाउन शुरू होने में
चक दे इंडिया

Sawai Singh Rajpurohit said...

आपका स्वागत है
"गौ ह्त्या के चंद कारण और हमारे जीवन में भूमिका!"


आपके सुझाव और संदेश जरुर दे!

रचना दीक्षित said...

वर्ल्ड कप जीतने पर आपको बहुत बधाई. सारे देश की दुआओं का असर हो ही गया.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

टीम इण्डिया ने 28 साल बाद क्रिकेट विश्व कप जीतनें का सपना साकार किया है।
एक प्रबुद्ध पाठक के नाते आपको, समस्त भारतवासियों और भारतीय क्रिकेट टीम को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ।

वीडियो - "झूला झूले से बिहारी.....'

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