Sunday, September 21, 2014

सिनेमा के साथ एक प्रयोग...

सिनेमा कहानी कहने का सबसे प्रभावी और सशक्त माध्यम है। आपके पास कोई ठोस विचार हो तो उसे अनगिनत लोगों तक संप्रेषित करने में इस विधा का कोई जवाब नहीं। मायानगरी की चकाचौंध में कुछ चेहरे ऐसे भी हैं जो इस विधा का प्रयोग कर रहे हैं एक मिशन के साथ। मिशन है आम लोगों में सोच का एक स्तर विकसित करना, उनके मनोमस्तिष्क को अपने विचारों से उद्द्वेलित कर देना जिससे कि यह लौ दर लौ आगे बढती रहे। यहाँ मैं बात कर रहा हूं श्रीराम डाल्टन और उनकी टीम की। निर्माता-निर्देशक सुभाष घई, सिनेमेटोग्राफर अशोक मेहता जैसी हस्तियों के साथ काम कर रहे श्रीराम ने स्वतंत्र रूप से काम करना शुरू किया, नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे कलाकार को लेकर  कुछ शौर्ट फिल्म्स बनाईं तो कईयों के हुनर को उभारा भी। हाल ही में लुप्त हो रही विधा 'बहुरुपिया' पर बनारस की पृष्ठभूमि में 'द लॉस्ट बहुरुपिया' बनाई जिसे राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी जी के हाथों राष्ट्रीय पुरष्कार भी मिला। अब वो झाड़खंड में पिछले कुछ दशकों में बदली सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों पर 'द स्प्रिंग थंडर' का निर्माण कर रहे हैं। लीक से अलग राह पर चलने वालों के आगे परेशानियाँ भी कम नहीं आतीं, मगर ये उनलोगों में हैं जो इनसे घबड़ा पीछे नही हटते बल्कि खुद तो आगे बढ़ते ही हैं दूसरों को सहारा दे रास्ता भी बनाते हैं। अब ये इस क्षेत्र में एक नया प्रयोग कर रहे हैं। झाड़खंड के आम लोगों को सिनेमा से जोड़ने का। मात्र दर्शक के रूप में नहीं बल्कि उनकी अपनी कहानी को कागज से लेकर परदे तक उकेरने में भी। प्रोजेक्ट छोटा और सहज नहीं मगर सपना और लगन उससे भी बड़ी है। झाड़खंड में समस्याओं की कमी नहीं तो इनके पास हौसलों की भी कमी नहीं। संसाधनों की कमी राह में थोड़े रोड़े भले डाल ले, राह रोक नहीं पाती। परिंदों की तरह इनकी परवाज परवान चढ़ रही है।  आप भी जुड़ सकते हैं इनके साथ इनके इस प्रयास मेंयदि आपके पास भी वही जज्बा और जज्बात हों जो इनके पास है....
(http://m.bhaskar.com/news/referer/521/JHA-RAN-national-award-for-the-film-directed-by-sriram-dalton-4602721-PHO.html?referrer_url=https%3A%2F%2Fwww.google.co.in%2F)

4 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (22-09-2014) को "जिसकी तारीफ की वो खुदा हो गया" (चर्चा मंच 1744) पर भी होगी।
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चर्चा मंच के सभी पाठकों को
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

मनोज कुमार said...

स्तुत्य कार्य!

savan kumar said...

सिनेमा के चरित्र पर सवाल उठने लगें हो तो ऐसे प्रयास सार्थक जरूरी हैं। जो विषय मुलक हो।
http://savanxxx.blogspot.in

Kavita Rawat said...

सार्थक व प्रेरक प्रस्तुति ...

वीडियो - "झूला झूले से बिहारी.....'

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