Friday, March 20, 2015

Equinox (समदिवारात्री): एक प्राक्ऐतिहासिक परंपरा की पुनर्स्थापना


हम सामान्यतः सिलेक्टिव और सुविधाजनक इतिहास पसन्द करते हैं और असहज प्रश्नों से परहेज ही बरतने की कोशिश करते हैं। इसी लिये अपने अनुकूल इतिहास लिखवाने और इतिहास में अपनी जगह तलाशने की प्रवृत्ति पाई जाती है। जिन ट्राइबल्स को असभ्य/अनार्य घोषित किया उनकी वैज्ञानिक सोच को स्वीकार कैसे करते ! रावण को प्रकांड ज्योतिष मानने से इंकार तो नहीँ कियाDismiss मगर उन लोगों की कालगणना किसपर आधारित थी इसपर सुविधाजनक और सुनियोजित चुप्पी साध ली ! आज भी पुस्तकालयों और संग्रहालयों को जमींदोज करना उसी मानसिकता का ही अंग है...
प्रकृति और व्यक्तिगत प्रभावों के बावजूद विश्व में कई ऐसी प्राचीन संरचनाएं अभी भी विद्यमान है जो प्राक्इतिहास में कालगणना के प्रयासों का दस्तावेज हैं। इंग्लैंड का स्टोन हेंज जो सॉल्स्टाइस देखने का प्रमुख स्थान है के बाद संभवतः झाड़खण्ड के हजारीबाग का पंखड़ी बरवाडीह एक मात्र ऐसी जगह है जहाँ Equinox (समदिवारात्री; 20-21 मार्च/ 22-23 सितंबर) के अवलोकन की महापाषाणकालीन परंपरा अन्वेषक श्री शुभाशीष दास द्वारा पुनर्जीवित की गई है। 
ऐसे स्थलों का अध्ययन व संरक्षण वैश्विक आवश्यकता है, यदि हम मानवता के इतिहास को समग्र रूप से समझने के प्रति वाकई गम्भीर हैं। ऐसी एक कड़ी का टूटना हमें अपनी विकास यात्रा की श्रृंखला से अलग कर देगा। यह स्थल भी आज अस्तित्व के संकट का सामना कर रहा है। माईनिंग के माध्यम से विकास और विरासत की जंग में विकास का पलड़ा ही भारी पड़ता दिख रहा है। देखें कब तक महफूज़ रह पाती है ये हमारी साझी विरासत !!!

Saturday, March 7, 2015

होली के रंग: गीतों के संग...





गीत-संगीत का हमारे जीवन में अहम् स्थान है। यही कारण है कि हिंदुस्तानी सिनेमा से भी गानों को अलग नहीं किया जा सकता। होली गीतों के साथ भी यही बात है। कई बेहतरीन गाने जुड़े हैं इस पर्व से। कुछ गाने कहानी को आगे बढ़ाते हैं (जैसे शोले), तो कुछ इसी लिए डाल दिए गए कि होली के बहाने थोड़ी 'लिबर्टी' ले ली जाये। मगर यादों में वही गाने रह जाते हैं जो कहीं न कहीं आपको भी कहीं छु जाते हों। वैसे भी होली के इतने रंगों में कोई भी आपको छु न जाये ये हो भी नहीं सकता। इन गानों की सफलता भी इसी में है कि आज नहीं तो कल कभी न कभी आपको खुद से जोड़ते ही हैं। अपने मनपसंद कुछ फ़िल्मी होली गानों का जिक्र कर रहा हूँ, आप भी अपने पसंदीदा गानों को जोड़ना चाहें तो अच्छा लगेगा... 
मोहे पनघट पे:- क्लासिकल 
होली आई रे कन्हाई:- हिंदुस्तानी मिट्टी की सुगंध लिए 
जा रे हट नटखट:- राधा-कृष्ण की होली एक ही पात्र के द्वारा अभिव्यक्त 
रंग बरसे:- होली के राष्ट्रीय गीत सदृश्य मान्यता प्राप्त यह गीत मुझे चारों मुख्य कलाकारों के बेहतरीन अभिनय के लिए ही पसंद है 
सात रंग में खेल रही है:- 'आखिर क्यों' प्रश्न की शुरुआत ही इस गाने से है 
होली आई होली आई:- अनिल कपूर का टपोरी अंदाज 
आज न छोड़ेंगे:- राजेश खन्ना का आमंत्रण और आशा पारेख की बेबसी... 
इनके अलावे 'सौदागर' में राज कुमार-दिलीप कुमार का होली दृश्य भी यादगार था... 
ये तो थे मेरे मनपसंद सात रंग। आप चाहें तो अपने रंग भी जोड़ इसे आगे बढ़ा सकते हैं.....

वीडियो - "झूला झूले से बिहारी.....'

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...