Pichle dinon Gurudev Ravindra Nath Taigore ki ek baal katha padhne ko mili. Sikshak divas par iski prasangikata ko dekhte hue ise aapke samaksh JPG roop mein rakh pa raha hun. Padhne mein thodi asuvidha to hogi, magar yakin hai bharatiya saikshanik vyavastha ko aaina dikhati yeh kahani aapko nirash nahin karegi. Sikshak divas par gurujanon ke prati shraddhasuman sahit...
Saturday, September 4, 2010
Sunday, August 15, 2010
अरुणाचल की भी थी भागीदारी स्वतंत्रता संग्राम में
केकर मनियोंग युद्ध स्मारक
अंग्रेजों की साम्राज्यवादी निति के विरुद्ध अपनी तरह का एक अनूठा प्रतिरोध उत्तर - पूर्व के इस भाग की और से भी दर्ज किया गया था. अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले के पंगिन क्षेत्र में एक खड़ी पहाड़ी (Cliff ), जिसे स्थानीय जनजातीय समुदाय 'आदि' अपने प्रदेश का प्रवेश द्वार मानता है साक्षी है उस अनूठे प्रतिरोध का जब इस समुदाय ने अपेक्षाकृत समृद्ध और सक्षम ब्रिटिश सेना के विरुद्ध अपने परंपरागत तीर - धनुष आदि हथियारों से प्रकट किया था. 1911 का यह आन्दोलन मात्र एक समूह विशेष तक ही सीमित नहीं रह गया था, बल्कि अंग्रेजी साम्राज्यवादी नीतियों से प्रभावित तमाम जनजातीय समूह इस विरोध में एकजुट थे. इसलिए स्थानीय समुदाय आज भी इस स्थल को देश के किसी भी अन्य स्वतंत्रता संग्राम जुड़े स्थलों के सामान सम्मान देते हुए स्वतंत्रता के राष्ट्रीय संघर्ष में अपने योगदान के रूप में देखते हुए संरक्षित रखे हुए है.
स्वतंत्रता आन्दोलन से जुड़ी ऐसी कई और विरासत जो इस देश में अब भी अज्ञात और अल्पचर्चित हैं उनके पुनः अध्ययन और संरक्षण की जरुरत है.
Saturday, May 15, 2010
Arunachal ki Bio diversity
Arunachal ki Jaiv - vividhata ke bare mein suna to tha, magar mahsus kar pane se ab tak vanchit tha. Ab jab sardi ja chuki hai aur barish dastak de rahi hai; yeh vividhata bhi saamne aa rahi hai.
Ek jhalak.
Jara sarp ko pahchanane mein madad karein.
Sunday, April 18, 2010
कोलकाता, 'City of Joy' और 'आनंद नगर'
हावड़ा से गोहाटी लौटता हुआ दमदम एअरपोर्ट पर 'डोमिनिक लेपियर ' की 'City of Joy' के हिंदी अनुवाद 'आनंद नगर' पर नजर पड़ी, जिसे पढने की उत्कंठा रोक न सका और इसे आज ही समाप्त की है. कोलकाता जैसे महानगर की पृष्ठभूमि में सारे भारत की ही विशिष्टता को प्रदर्शित करने वाली यह पुस्तक पिछले कुछ दशकों में बदलते कोलकाता और उससे जुड़े आम लोगों की जिंदगी को बखूबी अभिव्यक्त करती है. जमीन से कटे, बेगारी से हाथ रिक्शा खींचती किसानों की व्यथा, जिंदगी की जद्दोजहद, कोलकाता में स्थित छोटा सा भारत 'आनंद नगर' , कम्युनिस्ट आन्दोलन, मदर टेरेसा और अन्य मिशनरी सेवाएं आदि समकालीन कोलकाता का बखूबी चित्रण करती है यह पुस्तक. हाँ दीवाली के बाद दुर्गा पूजा का जिक्र जैसी बातें एक बारगी चौंकाती जरुर हैं, मगर कोलकाता के परिवेश को एक नए दृष्टिकोण और समग्र रूप से व्यक्त करने में यह पुस्तक अनूठी है. वाकई यह पुस्तक भारत के सन्दर्भ में आशा की एक नई दृष्टि देती है.
Wednesday, April 14, 2010
फिर मिलेंगे: चलते-चलते

टीवी पर सानिया की शादी की ही खबरें हैं। मैं 'व्यक्तिगत स्वतंत्रता' और 'मीडिया की दीवानगी' पर कुछ नहीं कहने जा रहा। ब्लॉग जगत में इसपर पहले ही काफी चर्चा हो चुकी होगी। मगर एक सवाल मन में उभरता है कि क्या अति सफलता (और सुन्दरता भी) किसी व्यक्ति को अपने परिवेश के प्रति इस कदर उपेक्षा का भाव भर देती है कि वो अपनी सामाजिक जिम्मेदारिओं के प्रति बिलकुल बेपरवाह ही हो जाये। आखिर जिस आम जनता ने इन्हें स्टार बनाया है उनकी भावनाओं के प्रति भी ये थोड़े उत्तरदाई हैं या नहीं !
अरुणाचल की वादिओं, और नेटवर्क मुक्त जोन से कुछ दिनों का यह संछिप्त विराम अब समाप्ति की ओर है, आज रात वापस रवाना हो जाऊंगा। जब तक इन्टरनेट के संपर्क में रहा पोस्ट्स का प्रयास रहेगा, उसके बाद फिर एक अनिश्चितकालीन ब्रेक।
बस तब तक -
"मुझे तुम याद करना और मुझको याद आना तुम,
मगर मैं लौट के आऊंगा, ये मत भूल जाना तुम..."
Saturday, April 10, 2010
मुंबई प्रवास और 'विविध भारती'
मुंबई प्रवास और 'विविध भारती'
अरुणाचल में 'विविध भारती' से बनी दूरी से उपजी असहनीय पीड़ा का उपचार अधूरा ही रह जाता यदि अपने मुंबई प्रवास के दौरान इसके केंद्र का भ्रमण न कर लेता. इसी क्रम में मैं बोरीवली स्थित इसके कार्यालय पहुँच ही गया, जहाँ न सिर्फ विविध भारती के युवा चेहरे और ज्ञान - विज्ञान पर आधारित कायक्रमों की कमान संभालने वाले युनुस खान साहब से, बल्कि अपनी हृदयस्पर्शी आवाज से श्रोताओं के दिलों में उतर जाने वाले कमल शर्मा जी से भी मुलाकात हुई.
शब्दों के साथ खेलने वालों से तो कई बार मुलाकात हुई है, मगर यहाँ पहली बार साक्षी बना आवाज के साथ चल रहे खेल का. अवसर मिला ज्ञान-विज्ञान पर आधारित, नए कलेवर में पुनः प्रारंभ हो रहे कार्यक्रम 'जिज्ञासा' की प्रसारण पूर्व तैयारी के अवलोकन का.
विविध भारती को सुतने हुए इससे जुड़े व्यक्तियों की जो छवि मानस पर बचपन से ही अंकित हो गई थी, उसपर खरी ही उतरी यह मुलाकात. और धन्यवाद अपने ब्लॉग मित्र और विविध भारती के प्रमुख सदस्य युनुस खान जी का भी जो माध्यम बने एक आम श्रोता और मनोरंजन के इस प्रमुख स्रोत को और भी करीब लाने का.
अंत में एक विशेष आग्रह भी कि - 'सुनना ना भूलें हर शनिवार रात 7 :45 PM पर, ज्ञान - विज्ञान की रेडियो - एक्टिव तरंग- "जिज्ञासा" युनुस खान के साथ.
Thursday, April 8, 2010
सांस्कृतिक पहेली का उत्तर
राज जी के उत्तर से पिछली पहेली की सारी बातें स्पष्ट हो ही गई हैं।
यह तस्वीर गोहाटी में 'कामख्या कामरूप' से ली गई थी। जैसा की विदित है कामख्या शक्तिपीठों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह तस्वीर भी उसी प्राचीन सभ्यता को निरुपित करती है जब मात्रिसत्तात्मक व्यवस्था प्रचलित थी और स्त्री की 'प्रजनन शक्ति' को धरती की उर्वरता से जोड़ते हुए सम्मान से देखा जाता था।
यह तस्वीर गोहाटी में 'कामख्या कामरूप' से ली गई थी। जैसा की विदित है कामख्या शक्तिपीठों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह तस्वीर भी उसी प्राचीन सभ्यता को निरुपित करती है जब मात्रिसत्तात्मक व्यवस्था प्रचलित थी और स्त्री की 'प्रजनन शक्ति' को धरती की उर्वरता से जोड़ते हुए सम्मान से देखा जाता था।
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